हम शरीफ लोग हैं, ज्यादा दुनियादारी में नहीं पड़ते

हम शरीफ लोग हैं, ज्यादा दुनियादारी में नहीं पड़ते

हम अदालत के सामने धरना देंगे 
लेकिन अदालत में जाकर गवाही नहीं देंगे

सड़क पर हादसा होगा तो हमारे पास अफ़सोस जताने का वक्त होगा
लेकिन जख्मी को अस्पताल पहुचाने का नहीं

जिस शख्स को जीते जी रोने के लिए कन्धा नहीं दिया
उसके जनाज़े को कन्धा देने में हम सबसे आगे रहेंगे

हम शरीफ लोग हैं, ज्यादा दुनियादारी में नहीं पड़ते

राजधानी में बम फटेगा तो facebook पर status बदल लेंगे
सिस्टम पर गुस्सा आएगा तो सरकार बदल लेंगे
शहर में बारूद की बू आएगी तो गाँव जाकर हवा पानी बदल लेंगे
ज़मीर सोने नहीं देगा तो करवट बदल लेंगे
बस ! इससे ज्यादा बदलाव की उम्मीद हमसे मत कीजिये

हम शरीफ लोग हैं, ज्यादा दुनियादारी में नहीं पड़ते

कहीं ऐसा तो नहीं की हमारी शराफत हमारे ज़मीर और हमारी सच्चाई का गला घोंट रही है
आप खुद तय कीजिये

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