बैटमैन बनाम सुपरमैन: डॉन ऑफ़ जस्टिस रिव्यु

3 साल के लम्बे इंतज़ार के बाद कल बहुप्रतीक्षित फिल्म बैटमैन v सुपरमैन डौन ऑफ जस्टिस देखने का अवसर मिला। मैं निजी तौर पर बैटमैन का बहुत ही बड़ा प्रशंषक हूँ और फ्रैंक मिलर की द डार्क नाईट रिटर्न्स बहुत ही उम्दा ग्राफ़िक नोवेल है जिसमे 60 बरस का बैटमैन, सुपरमैन से लोहा लेकर उसे हराता है. जैक स्नायडर की यह फिल्म थोड़ी बहुत डार्क नाइट रिटर्न्स पर ही आधारित है, खासकर बैटमैन एवं सुपरमैन की फाइट और बैटमैन की लोह पोशाक।

फिल्म शुरू होती है बैटमैन के लार्जेर देन लाइफ ट्रैजिक सीन से, फिर धीरे धीरे कहानी दोनों सुपर हीरो के टकराव की नीव रखते हुए आगे बढती है. इंटरवल के बाद बैटमैन और सुपरमैन का टकराव होता है और कौन जीतता है इसके लिए आपको मूवी देखनी होगी। देखा जाए तो यह मूवी बनायीं गयी है जस्टिस लीग की नीव रखने के लिए, फिल्म के अंत तक पता चल जाता है जस्टिस लीग में कौन कौन होगा और विलेन शायद darkseid ही होगा।

कहानी थोड़ी स्लो है पर आधी फिल्म के बाद रफ़्तार है जो अंत तक बरक़रार रहती है. हेनरी केविल सुपरमैन के किरदार में ठीक ठाक है, शायद उन्हें थोड़ी मेहनत और करनी होगी, गाल गदोत वंडर वीमेन के छोटे रोल में अपनी छाप छोड़ने में सफल रही है, खासकर उनका बैकग्राउंड म्यूजिक जो हान्स ज़िम्मर ने रचा है, अच्छा लगता है, जेस इस्सनबेर्ग थोड़े सनकी बिज़नस मैन के रोल में अच्छे है, जैसन मोमॉआ केवल एक दृश्य के मेहमान है, बाकी सब ठीक ठाक है.

तारीफ के काबिल है बेन एफ्फ्लैक, वार्नर ब्रोदेर्स ने एकदम सही निर्णय लिया उन्हें बैटमैन के किरदार के लिए चुनकर, अगर कोई नया एक्टर होता तो शायद न्याय नहीं कर पाता। बेन पर काफी प्रेशर था क्योंकि इससे पहले क्रिस्टोफर नोलन की द डार्क नाईट ट्राइलॉजी लोगो के दिलो में ख़ास जगह बना चुकी थी और लोगो की बेन और क्रिस्टियन बेल के बीच comparison होना तय था.

जहां तक मुझे लगता है एफ्लिक का बैटमैन सबसे नजदीकी बैटमैन है जो कॉमिक्स में दिखाया जाता है. गंभीर, थोडा चिडचिडा, गुस्से से भरा हुआ, एक शैतान और एफ्लिक ने बैटमैन के किरदार को सही आयाम दिया है. एफ्लिक के अलावा जेरेमी आयरन्स भी अल्फ्रेड के रोल में काफी दमदार है, खासतोर पर उनका पहनावा काफी आकर्षक है, देखा जाए तो वो ब्रूस वेन के पिता कम और एक दोस्त ज्यादा लगे जो अच्छी बात है.

अभी थोड़े स्पोइलेर्स जो कहानी को पूरी बयां नहीं करेंगे पर कुछ सवाल जिनके जवाब फिल्म में नहीं हैं. पूरी फिल्म में लेक्स लुथोर के 2 उद्देश्य है, एक बैटमैन और सुपरमैन को भिड़ाना और दूसरा दोनों से शक्तिशाली दानव बनाना। लेक्स एक दृश्य में कहता है की उसने कुछ खून से लिखे पेपर्स भिजवाए बैटमैन को जिससे बैटमैन उग्र होकर सुपरमैन से टकरायें, साथ ही उसने सुपरमैन की माँ को बंदी बना लिया जिससे सुपरमैन बैटमैन से लड़े. पर खुनी पेपर्स तो ब्रूस वेन को मिले थे, तो क्या लेक्स जानता है ब्रूस वेन ही बैटमैन है?

जब भी कभी लुइस लेन किसी मुसीबत में होती थी, सुपरमैन कहीं से भी उसके पास आ जाता था और उसे बचा लेता था, तो क्या वो अपनी माँ की चीख सुनकर उसे बचाने नहीं जा सकता था, बैटमैन को समझाने और उससे बेवजह लड़ाई की ज़रुरत ही नहीं थी.

वंडर वीमेन जिसे लेक्स काफी लम्बे अरसे से ढून्ढ रहा है, वो लेक्स की पार्टी में उसके आस पास घूम रही है, थोडा अजीब है.

लेक्स की पार्टी में जब ब्रूस और क्लार्क एक दुसरे का सामना करते है तब लेक्स दोनों से मिलता है और क्लार्क से कहता है कि ब्रूस वेन से पंगा ना लेना। डेली प्लेनेट जिसमे क्लार्क महज़ एक छोटा सा मुलाजिम है, वो डेली प्लेनेट ब्रूस वेन का है और लेक्स खुद भी बहुत बड़ा बिज़नसमेन हैं. सिर्फ क्लार्क ही है जिसकी औकात दोनों से काफी कम है पर आश्चर्य लेक्स लुथोर क्लार्क को जानता है और तीनो आपस में ऐसे बात करते है जैसे क्लार्क भी कोई बड़ी हस्ती है. हो सकता है ब्रूस, क्लार्क को पहचान गया हो पर क्या लेक्स भी पहचान गया?

ब्रूस का अकेले गाडी खुद चलाकर आना भी थोडा अजीब है और गाडी भी काफी छोटी थी. फिल्म के अंत में सभी को पता चल गया कि क्लार्क ही सुपरमैन है, ऐसा नहीं होना चाहिए था.

खैर फिल्म में थोड़े लूपहोल है पर बैटमैन और सुपरमैन को एक ही मूवी में देखना काफी है और साथ में उनकी दमदार लड़ाई भी. हर बैटमैन और सुपरमैन प्रशंषक के लिए यह फिल्म सपना सच होने जैसी है. हांलाकि मुझे बैटमैन इसलिए पसंद है क्योंकि उसकी कहानियों में एक इंसानों वाली फीलिंग होती है पर इस फिल्म में एलियन फीलिंग है जो जस्टिस लीग में और ज्यादा होगी जिससे बैटमैन की भूमिका काफी लिमिटेड हो जायेगी, देखते हैं. इस फिल्म में मुख्य विलेन से सुपरमैन और वंडर वीमेन ही लड़ते है, बैटमैन का समय खुद को बचाने में ही जाता है क्योंकि वो उस दानव के सामने नहीं टिक सकता।

बहरहाल मूवी अच्छी है, देखिये सिर्फ बैटमैन और सुपरमैन की शानदार जंग के लिए, यह प्लस पॉइंट बाकी सभी कमियों पर भारी है, एक पुराना गाना याद आया “ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा”

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