शिवाय : थोड़ा सा टेकन, चुटकी भर टॉम्ब रेडर (विडियो गेम) और ए मैन फ्रॉम नोवेयर

आज दफ्तर में ख़ास काम न होने की वजह से, बगल वाले सिनेमा हॉल में अजय देवगन की शिवाय देखी। ऐ दिल मुश्किल देखना मुश्किल सा लगा क्योंकि 4-4 लोगो की गुथमगुथा प्रेम कहानिया वैसे भी मेरे को हज़म नहीं होती है।

शिवाय के बारे में तो यही कहूंगा कि यह फिल्म फ़ास्टपेस है, बीच बीच में इमोशनल सीन्स थोड़ा बहुत पकाते है, लेकिन हिंदी फिल्मो में यह ज़रूरी है. अजय देवगन ही इस फिल्लम का प्रमुख पेग है बाकी सभी कलाकार महफ़िल में चखने के जैसे है. फिल्म में कुछ दृश्य रबर हो गए है लेकिन फिर भी यह फिल्लम बांधे रखने का माद्दा लिए हुए है. अजय देवगन, अक्षय कुमार और सनी देओल बॉलीवुड में कुछ अच्छा होने की उम्मीद जगाते है बाकी सभी तो वही घिसी पिटी प्रेम कहानिया, हवाई एक्शन और फूहड़ कॉमेडी की टकसाल चला रहे हैं.

हॉलीवुड प्रेमियों के लिए यह फिल्म लियाम नीसॉन की टेकेन, चुटकी भर टॉम्ब रेडर (विडियो गेम), और स्वादानुसार ए मैन फ्रॉम नोवेयर का फ्लेवर लिए हुए है. बोरिंग नहीं है लेकिन WoW भी नहीं। कुल मिलकर विशुद्ध मनोरंजन। और हाँ इसका प्रभु शिव शंकर से कुछ ज़्यादा लेना देना नहीं है.

फिल्लम के अंत में एक मज़ेदार और देशभक्ति वाली बात हुयी, कुछ युवा जोशीले दर्शकों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद और हिंदुस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए, इसकी वजह शायद अजय देवगन की वह घोषणा है जिसमे उसने शिवाय के पहले दिन की कमाई भारतीय सेना को डोनेट करने को कहा है और शायद मवाद और दिल की मुश्किल का बहिष्कार व्यक्त करने का अनूठा तरीका। बहरहाल वाकई काबिले तारीफ।

शिवाय अच्छी फैमिली मूवी है, एक बार देखने लायक। दिल मुश्किल और शिवाय में से शिवाय ही चुने, बोल हर हर महादेव।

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