फेमिनिज्म का षड़यंत्र और माय च्वॉइस

सफलता, सक्सेस, कैरियर आज के युवा का प्रमुख ध्येय यही है और उनको दोष नहीं दे सकते गोयाकि वो कई बसंत इसी उद्देश्य पूर्ती में निकाल देते हैं, और आजकल feminism  नाम का जो षड़यंत्र चल रहा है उसमे युवा लड़कियों को भी इसी भेडचाल में धकेल दिया है. असल में feminism, जिसकी परिभाषा है महिलाओं का शशक्तिकरण, की जिस वर्ग को ज़रुरत है, उन बेचारियों को तो पता भी नहीं की feminism किस चिड़िया का नाम है. दीपिका पादुकोण नामक अभिनेत्री का हाल ही में एक विवादस्पद विडियो आया जिसे feminism का जामा पहनाकर पेश किया गया. इसमें अभिनेत्री का मानना है कि वो एक से अधिक लोगो से सम्भोग करे, भरे बाज़ार नग्न घूमे, देर रात घर आये या कुछ भी करें “MY CHOICE”. कोई अतिश्योक्ति नहीं है की भेड़ की खाल में भेड़िया छुपा है. स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति का मैं सम्मान करता हूँ पर आप जो भी करें एक जिम्मेदारी के साथ करें, दीपिका का युवा वर्ग दीवाना है और इस बेमतलब और तर्कहीन विडियो में छुपा भेड़िया कितने मासूमो का शिकार करेगा यह तो वक़्त ही बताएगा। अभी थोड़े दिन पहले यह विडियो देखा तो मन विचलित हो उठा. दीपिका भरे बाज़ार नग्न घूम सकती है क्योंकि उसके इर्द गिर्द मांसल पहलवानों का कारवां चलता है, परन्तु देश की हर लड़की को ऐसी वैभवता उपलब्ध नहीं है. शायद उसे अपने पिता से पूछना चाहिए, कितनी विषम परिस्तिथियों का सामना करके उन्होंने दीपिका को बड़ा किया होगा, अगर वो भी MY CHOICE बोलकर कैमरा लेकर विश्व भ्रमण पर निकल जाते तो शायद दीपिका पैदा भी नहीं होती। हाल ही में प्रियंका चोपड़ा ने कहा की उसे मर्दों की ज़रुरत सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए है, सोचिये अगर यही बयान कोई पुरुष अभिनेता देता हो उसे किन हालातो का सामना करना पड़ता?

खैर, अंत में यही कहूँगा कि ज़िन्दगी choice का नाम नहीं है बल्कि जिंदगी का सही अर्थ है दूसरो की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी को महसूस करना। वो ही सच्ची ख़ुशी है और वो ही है RIGHT CHOICE.

MY CHOICE का वो तर्कहीन विडियो नीचे दिया हुआ है, देखिये और अपने विचार व्यक्त कीजिये

 

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