दंगल : हानिकारक बापू और देश का सम्मान

KishanH December 31, 2016
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दंगल dangal

2 दिन पहले परिवार के साथ दंगल देखी, कहानी हरियाणा के पहलवान महावीर सिंह फोगट और उनकी 2 बेटियों गीता और बबीता पर केंद्रित है, ज्ञातव्य है कि गीता फोगट ने सन 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत था. आमिर खान ने महावीर फोगट का किरदार निभाया है.

बहरहाल दंगल की कहानी कुछ यूँ हुयी कि महावीर अपनी जवानी के वक़्त देश के लिए मैडल लाना चाहते है, पर जैसा कि मर्दों के लिए तयशुदा है तो भैय्या आदमी के लिए निहायत ही ज़रूरी है घर चलाने के लिए पैसा लाना, देश वेश, शौक वोक सब बाद में. तो महावीर भाऊ भी गृहस्ति की चक्की में ऐसे पिसे जैसे गेंहू के साथ घुन. लेकिन इस घुन के चित्त में एक धुन रह जाती है, देस को सोने का मैडल दिलाने की और उसके लिए चाहिए एक अदद लड़का।

तो बस फोगट भाऊ लड़के की आस की 4 लड़कियों के पिता बन जाते है, हर बार संतान जनम से ठीक पहले फोगाट भाऊ मृग मरीचिका के शिकार हो जाते है, पाठको के लिए : प्यासे को दूर रेत पर पानी का आभास होता है लेकिन वहां जाने पर रेत ही हाथ लगती है क्योंकि जब सूर्य की किरणे रेत के कणो पर पड़ती है तो पानी जैसा आभास होता है, यह आभास और आस ही मृग मरीचिका है.

कहानी यूँ ही चलती है और फोगट भाऊ अपने सपन को दफ़न कर ज़िन्दगी की कटाई करते है, लेकिन जब एक दिन उनकी बड़ी बेटियां गीता और बबीता 2 छोरो को फोड़ कर आ जाती है तो फोगट भाऊ को एहसास होता है कि उनकी फसल पूरी ख़राब नहीं है और…….
म्हारी छोरियां छोरो से कम हैं के ?

फिर तो छोरियों का तोंदू बापू बन जाता है हानिकारक बापू, और कहानी आगे बढ़ती है जहां गीता पहले नेशनल चैंपियन बनती है और फिर इंटरनेशनल स्वर्ण पदक की आस में राष्ट्रीय खेल अकादमी जाती है, जहां उस पर युवा और चंचल मन हावी हो जाता है और शाहरुख़ की दुल्हनिया उसे भाने लगती है, थोड़े भटकाव, परिवार से अलगाव के बाद सुबह की भूली शाम को घर वापस आती है और फिर इंटरनेशनल गोल्ड जीतकर फोगट भाऊ के सपने को मूर्त रूप देती है, गोयाकि प्यासे को अंत में पानी का पोखर नसीब होता है, बाकी फिल्लम देखकर आप इसका आनंद लीजिये।

दंगल में आमिर खान ने सराहनीय काम किया है और हानिकारक बापू को उन्होंने दिल और शरीर से जिया है, शरीर को यहाँ इसलिए चिन्हित किया है क्योंकि आमिर इस फिल्लम के लिए पहले धुलधुले हुए और फिर सौष्ठव। संभवत इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके शरीर की मांसपेशियों ने कहा हो कि भईया यह बंदा तो आपड़े लिए भी हानिकारक है.

बहरहाल दंगल फिल्लम पूरे परिवार के साथ देखने लायक है और इस बात का संतोष है कि फिल्म में कहानी की मांग के नाम पर अश्लील दृश्य नहीं परोसे गए है, सेहत के लिए सिर्फ बापू ही हानिकारक है.

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KishanH

मौजूद परिस्तिथियों का प्रभाव, आस पास से मिली प्रेरणा या फिर ऐसे ही विचारों के भंवर में गोते लगाकर, जो मन में आता है यहां लिख देता हूँ, धन्यवाद।